दिल-दिमाग के बीच दौड़ रहे विचारों को लिख देने से मन साफ होता है और कुछ नया सोचने की जगह बनती है... वो किरदार जिन्होंंने मेरे अंदर अपना घर बना लिया है, उन्हें दूसरे घर में शिफ्ट करना ज़रूरी हो गया है... जिससे नए किरदारों को जगह मिले... मिलिए मेरे किरदारों से.. कहीं ये आपके भी जानने वाले तो नहीं हैं...
hmmmmm achi koshish h....bht feel dikh ri h...
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